एकादशी कब है? आज की एकादशी और 2026–27 की पूरी सूची
एकादशी कब है (ekadashi kab hai)? आज की तिथि, आने वाली सभी एकादशी की तारीखें, सरल व्रत विधि, पारण का समय और भगवान विष्णु के मंत्र।
नहीं, आज एकादशी नहीं है
अगली एकादशी इंदिरा एकादशी है, मंगलवार, 6 अक्टूबर को (3 दिन बाद)।
एकादशी हर महीने दो बार आती है: शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को, यानी लगभग हर 15 दिन में। ऊपर का बॉक्स बताता है कि आज एकादशी है या नहीं, और अगली एकादशी कब है। यह रोज़ अपने आप बदलता है और द्रिक पंचांग (नई दिल्ली) पर आधारित है।
आने वाली एकादशी
| तारीख | एकादशी |
|---|---|
| मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 | इंदिरा एकादशी |
| गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 | पापांकुशा एकादशी |
| गुरुवार, 5 नवंबर 2026 | रमा एकादशी |
| शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 | देवउठनी एकादशी |
| शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 | उत्पन्ना एकादशी |
| रविवार, 20 दिसंबर 2026 | मोक्षदा एकादशी |
| रविवार, 3 जनवरी 2027 | सफला एकादशी |
| सोमवार, 18 जनवरी 2027 | पौष पुत्रदा एकादशी |
| मंगलवार, 2 फ़रवरी 2027 | षटतिला एकादशी |
| बुधवार, 17 फ़रवरी 2027 | जया एकादशी |
| गुरुवार, 4 मार्च 2027 | विजया एकादशी |
| गुरुवार, 18 मार्च 2027 | आमलकी एकादशी |
तारीखें नई दिल्ली के लिए हैं; आपके शहर में तिथि का समय थोड़ा अलग हो सकता है। जब एकादशी तिथि दो दिन में फैली होती है, तब पंचांग व्रत के लिए एक दिन तय करता है; यहाँ वही तारीख दी गई है। अगर आपके परिवार में वैष्णव या स्मार्त परंपरा के हिसाब से अलग दिन व्रत रखा जाता है, तो अपनी परंपरा मानें।
एकादशी क्या है?
एकादशी भगवान विष्णु का दिन है। साल में आमतौर पर 24 एकादशी होती हैं, और जिस साल अधिक मास (मलमास) पड़ता है, उस साल 26। हर एकादशी का अपना नाम और अपना महत्व है। जैसे देवशयनी एकादशी, जब माना जाता है कि भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में जाते हैं; देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी, जब वे जागते हैं; मोक्षदा एकादशी, जो गीता जयंती के दिन पड़ती है; और निर्जला एकादशी, जो गर्मियों में बिना पानी के रखी जाती है।
सबके पीछे भाव एक ही है: पंद्रह दिन में एक दिन हल्का खाएँ, थोड़ा रुकें, और मन भगवान में लगाएँ। बहुत से लोगों को लगता है कि पेट हल्का हो तो पूजा और ध्यान में मन ज़्यादा आसानी से लगता है।
एकादशी व्रत कैसे रखें (सरल विधि)
व्रत रखने के कई तरीके हैं, और सभी सही हैं। वही चुनें जो आपका शरीर और आपकी दिनचर्या सह सके।
- निर्जला व्रत: एकादशी के सूर्योदय से अगले दिन पारण तक न अन्न, न जल। यह सबसे कठिन व्रत है और हर किसी के लिए नहीं है।
- जल या फल का व्रत: केवल पानी, फल और दूध।
- फलाहार: दिन में एक या दो बार सादा भोजन, बिना अनाज और दाल के। चावल, गेहूँ, दाल और फलियाँ परंपरा से नहीं खाई जातीं। फल, दूध, दही, मेवे, आलू, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े का आटा आम हैं।
- व्रत न रख सकें तो: बस अनाज छोड़ दें, हल्का खाएँ, और दिन में थोड़ा ज़्यादा समय जप या पाठ में दें। भाव सबसे ज़रूरी है।
सेहत का ध्यान रखें। गर्भवती, बुज़ुर्ग, बीमार या दवा लेने वाले लोग बिना पानी का व्रत न रखें; डॉक्टर से पूछें। डायबिटीज़ हो तो खाना छोड़ने से पहले ज़रूर सलाह लें। ज़रूरत भर खाइए और दिन को प्रार्थना से पवित्र बनाइए।
एकादशी का दिन, कदम दर कदम
- सुबह जल्दी उठें, स्नान करें, और भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की तस्वीर के सामने दीपक जलाएँ।
- तुलसी दल चढ़ाएँ। तुलसी एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें, क्योंकि एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
- "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" 108 बार जपें।
- थोड़ा पाठ करें: भगवद गीता का एक अध्याय, या उस दिन की एकादशी की व्रत कथा।
- दिन भर जब भी याद आए, मन में "ॐ नमो नारायणाय" दोहराते रहें।
- शाम को फिर दीपक जलाएँ और आरती करें।
पारण कब करें?
एकादशी व्रत अगले दिन, यानी द्वादशी को खोला जाता है। इसे पारण कहते हैं। पारण अपने स्थानीय पंचांग में दिए गए समय के भीतर करें, जो आमतौर पर सुबह होता है। बहुत से लोग पहले थोड़ा पानी, तुलसी दल और फल लेकर व्रत खोलते हैं, फिर सादा भोजन करते हैं। पारण का समय शहर के सूर्योदय के हिसाब से बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देख लें।
एकादशी व्रत कथा
हर एकादशी की अपनी अलग व्रत कथा है, और वही उस दिन पढ़ी या सुनी जाती है। ज़्यादातर कथाएँ पुराणों में भगवान श्रीकृष्ण और राजा युधिष्ठिर के संवाद के रूप में मिलती हैं: युधिष्ठिर पूछते हैं कि इस महीने की एकादशी का नाम और महत्व क्या है, और श्रीकृष्ण उसकी कथा सुनाते हैं। इसलिए किसी एक "एकादशी कथा" की जगह, उस दिन की एकादशी का नाम देखें (ऊपर की सूची में) और उसी की कथा पढ़ें। घर के बड़ों से सुनना या किसी भरोसेमंद व्रत कथा पुस्तक से पढ़ना सबसे अच्छा है।
एकादशी के मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय Om Namo Bhagavate Vasudevaya
"मैं उन्हें प्रणाम करता हूँ जो हर जीव और हर चीज़ में बसते हैं।" यह भगवान विष्णु का द्वादशाक्षर (बारह अक्षरों वाला) मंत्र है और एकादशी पर सबसे ज़्यादा जपा जाता है। परंपरा से इसे मन की उलझन सुलझाने और मोह छोड़ने के लिए जपा जाता है। Mahakatha पर सुनें: Om Namo Bhagavate Vasudevaya
ॐ नमो नारायणाय
ॐ नमो नारायणाय Om Namo Narayanaya
"मैं जगत के स्वामी भगवान नारायण को प्रणाम करता हूँ।" विष्णु का अष्टाक्षर मंत्र, इतना छोटा कि दिन भर मन में दोहराया जा सके। एकाग्रता और शांत सोच के लिए जपा जाता है। Mahakatha पर सुनें: Om Namo Narayanaya
विष्णु शान्ताकारम्
शान्ताकारं भुजग शयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। Shaantaakaaram Bhujaga Shayanam Padmanaabham Suresham, Vishvaadhaaram Gagana Sadrsham Meghavarnam Shubhaanggam
"जिनका रूप शांत है, जो शेषनाग पर विश्राम करते हैं, जिनकी नाभि से कमल निकला है, जो देवताओं के स्वामी हैं, पूरे संसार का आधार हैं, आकाश जैसे विशाल हैं और बादलों जैसे साँवले हैं, उन भगवान विष्णु को नमन।" यह विष्णु का ध्यान श्लोक है, जो मन की शांति और चिंता से छुटकारे के लिए पढ़ा जाता है। Mahakatha पर सुनें: Vishnu Shantakaram
हरे कृष्ण हरे राम (महामंत्र)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare, Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare
सोलह नामों का यह महामंत्र श्रीकृष्ण और श्रीराम को पुकारता है, जो दोनों विष्णु के ही रूप हैं। बहुत से भक्त एकादशी पर इसकी अतिरिक्त मालाएँ जपते हैं। Mahakatha पर सुनें: Hare Krishna Hare Rama
गिनती के लिए माला लें, या हमारा मुफ़्त जप काउंटर इस्तेमाल करें। 108 बार ही क्यों? पढ़ें: मंत्र 108 बार क्यों जपते हैं।
महाकथा रेडियो एक निःशुल्क, 24 घंटे चलने वाला मंत्र रेडियो है, बिना विज्ञापन। इस पर विष्णु और कृष्ण के मंत्र दिन-रात बजते रहते हैं। व्रत के दिन पृष्ठभूमि में लाइव सुनें। किसी अपने के लिए प्रार्थना करनी हो तो "प्रार्थना अनुरोध" रोज़ सुबह 7 बजे और शाम 7 बजे (भारतीय समय) प्रसारित होता है: प्रार्थना अर्पित करें।
लोग पूछते हैं
आज एकादशी है क्या?
इस पेज के सबसे ऊपर का बॉक्स बताता है कि आज एकादशी है या नहीं। यह द्रिक पंचांग (नई दिल्ली) पर आधारित है और हर रात 12 बजे (भारतीय समय) बदल जाता है।
अगली एकादशी कब है?
ऊपर "आने वाली एकादशी" की सूची देखें। एकादशी लगभग हर 15 दिन में आती है: अमावस्या के बाद ग्यारहवें दिन और पूर्णिमा के बाद ग्यारहवें दिन।
एकादशी व्रत कथा कौन सी पढ़ें?
उसी दिन की एकादशी की कथा पढ़ें, क्योंकि हर एकादशी की कथा अलग है। एकादशी का नाम ऊपर की सूची में दिया गया है।
सबसे बड़ी एकादशी कौन सी है?
परंपरा से निर्जला एकादशी को सबसे बड़ी माना जाता है; कहा जाता है कि इसका पुण्य सभी 24 एकादशी के बराबर है। अगली निर्जला एकादशी 14 जून 2027, सोमवार को है। मोक्षदा और देवशयनी एकादशी का भी विशेष महत्व है। विस्तार से पढ़ें: निर्जला एकादशी।
एकादशी के व्रत में क्या खाएँ?
अनाज और दालें परंपरा से नहीं खाई जातीं। फल, दूध, दही, मेवे, आलू, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े का आटा आम हैं। सादा खाएँ, और सेहत को ज़रूरत हो तो पर्याप्त खाएँ।
एकादशी का व्रत कब खोलें?
अगले दिन, द्वादशी को, अपने स्थानीय पंचांग में दिए पारण समय के भीतर, आमतौर पर सुबह। पहले थोड़ा पानी, तुलसी और फल लेकर व्रत खोलना अच्छा माना जाता है।