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त्योहार · अपडेट 3 अक्टूबर 2026 · Read in English

तर्पण विधि और मंत्र: पितृ पक्ष 2026 में पितरों का स्मरण

पितृ पक्ष 2026: 26 सितंबर से 10 अक्टूबर, सर्व पितृ अमावस्या शनिवार 10 अक्टूबर। घर पर तर्पण की सरल विधि, पितृ गायत्री और श्राद्ध के मंत्र अर्थ सहित।

तर्पण का अर्थ है पितरों को जल अर्पित करके उन्हें याद करना। सुबह स्नान के बाद, दक्षिण की ओर मुँह करके, काले तिल मिला जल अंजलि से तीन-तीन बार हर पूर्वज के नाम पर छोड़ा जाता है, और पितृ गायत्री ॐ पितृगणाय विद्महे जगतधारिणी धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात् जपी जाती है। पितृ पक्ष अभी चल रहा है: 26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक, और सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को है।

पितृ पक्ष 2026 कब है

तारीखें नई दिल्ली के लिए हैं; आपके शहर में तिथि का समय थोड़ा अलग हो सकता है।

पितृ पक्ष के इन पंद्रह दिनों में परिवार अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और सभी पूर्वजों को याद करते हैं। उनके नाम पर जल, तिल और भोजन अर्पित किया जाता है। यह डर की नहीं, कृतज्ञता की परंपरा है: एक तरह से कहना कि "हम आपको भूले नहीं हैं।" जिस पूर्वज का देहांत जिस तिथि को हुआ, उसी तिथि को उनका श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। अगर तिथि याद न हो, तो सर्व पितृ अमावस्या के दिन सभी पितरों का तर्पण किया जा सकता है।

तर्पण विधि (घर पर सरल तरीका)

कई परिवारों में तर्पण पंडित जी के साथ किया जाता है, और हर क्षेत्र की रीत अलग होती है। आपके घर में जो परंपरा है, उसी को मानें। एक सरल तरीका यह है:

  1. तैयारी: एक थाली या बर्तन, साफ़ पानी, थोड़े काले तिल, और हो सके तो कुशा घास रख लें।
  2. दिशा: सुबह स्नान के बाद दक्षिण की ओर मुँह करके बैठें। दक्षिण दिशा परंपरा से पितरों की दिशा मानी जाती है। कई परिवारों में पुरुष इस समय जनेऊ दाएँ कंधे पर कर लेते हैं।
  3. स्मरण: पहले अपना नाम और गोत्र बोलें, फिर हर पूर्वज का नाम और उनसे अपना रिश्ता: पिता, माता, दादा, दादी।
  4. जल अर्पण: दाएँ हाथ की अंजलि में तिल मिला जल लें और अँगूठे की ओर से धीरे-धीरे बर्तन में गिराएँ, हर पूर्वज के लिए तीन बार। परंपरा में अर्पण के साथ "स्वधा" शब्द बोला जाता है। संस्कृत न आए तो अपनी भाषा में कहें: "यह जल आप तक पहुँचे, आपको शांति मिले।"
  5. मंत्र जप: पितृ गायत्री 11 या 21 बार, या माला पर 108 बार जपें।
  6. समापन: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बोलकर एक मिनट चुप बैठें। बाद में यह जल किसी पेड़ या तुलसी की जड़ में डाल दें। पितरों के नाम पर गाय, कौवे या किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराना भी पितृ पक्ष का हिस्सा है।

हर कदम याद न हो, तो चिंता न करें। तर्पण का असली भाव है प्रेम और कृतज्ञता से याद करना।

तर्पण मंत्र और श्राद्ध मंत्र

पितृ गायत्री मंत्र

ॐ पितृगणाय विद्महे जगतधारिणी धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात्। Om Pitruganaya Vidmahe, Jagatdharini Dhimahi, Tanno Pitru Prachodayat

मैं सभी दिवंगत आत्माओं को और उस शक्ति को प्रणाम करता हूँ जो संसार को थामे हुए है। वे हमें शांति और समझ का आशीर्वाद दें। यह मंत्र परंपरा से पितरों के आशीर्वाद के लिए और दुख की घड़ी में मन को सहारा देने के लिए जपा जाता है। Mahakatha पर सुनें: पितृ गायत्री मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय Om Namo Bhagavate Vasudevaya

मैं उस प्रभु को प्रणाम करता हूँ जो हर जीव और हर वस्तु में बसते हैं। मान्यता है कि श्राद्ध और तर्पण भगवान विष्णु के माध्यम से पितरों तक पहुँचते हैं, इसलिए अंत में यह द्वादशाक्षर मंत्र बोला जाता है। Mahakatha पर सुनें: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

त्वमेव माता

त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव Tvameva Mata Cha Pita Tvameva, Tvameva Bandhushcha Sakha Tvameva

हे प्रभु, तुम ही मेरी माता हो, तुम ही पिता, तुम ही मेरे बंधु और सखा। जिनके माता या पिता अब साथ नहीं हैं, उनके लिए यह एक शांत प्रार्थना है, जो अकेलेपन और दुख में सहारा देती है। Mahakatha पर सुनें: त्वमेव माता

ॐ पूर्णमदः (शांति मंत्र)

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः Om Purnamadah Purnamidam, Purnat Purnamudachyate, Purnasya Purnamadaya, Purnamevaavashisyate, Om Shaantih Shaantih Shaantih

वह भी पूर्ण है, यह भी पूर्ण है। पूर्ण से पूर्ण ही निकलता है, और पूर्ण में से पूर्ण निकाल लें तो भी पूर्ण ही बचता है। शांति, शांति, शांति। यह याद दिलाता है कि जिनसे हमने सच्चा प्रेम किया, वे कभी पूरी तरह खोते नहीं। Mahakatha पर सुनें: ॐ पूर्णमदः

श्राद्ध के पूरे संकल्प और पिंडदान के मंत्र आम तौर पर पंडित जी बोलते हैं। घर पर अपने आप स्मरण करने के लिए ऊपर दिए मंत्र काफ़ी हैं।

अगर आप खुद तर्पण नहीं कर सकते

बहुत से लोग घर से दूर रहते हैं, पास में पंडित जी नहीं होते, या विधि नहीं जानते। फिर भी इस पितृ पक्ष आप अपने पितरों को याद कर सकते हैं:

अगर अभी दुख भारी लग रहा है, तो अपने साथ नरमी बरतें। मंत्र मन को थोड़ा शांत कर सकते हैं, पर ज़रूरत हो तो डॉक्टर, काउंसलर या किसी अपने से बात करना भी उतना ही ज़रूरी है।

महाकथा रेडियो एक निःशुल्क, 24 घंटे चलने वाला मंत्र रेडियो है, बिना विज्ञापन। यहाँ विष्णु, शिव और ॐ के मंत्र दिन-रात बजते हैं। याद करते हुए लाइव सुनें। मन की शांति के लिए शांति मंत्र भी देखें।

लोग पूछते हैं

तर्पण कैसे करें?

स्नान के बाद दक्षिण की ओर मुँह करके बैठें, दाएँ हाथ की अंजलि से काले तिल मिला जल हर पूर्वज के नाम पर तीन बार अर्पित करें, उनका नाम और अपना रिश्ता बोलें। फिर पितृ गायत्री जपें और कुछ देर शांत बैठें। कई परिवार यह पंडित जी के साथ करते हैं।

पितृ पक्ष 2026 कब से कब तक है?

पितृ पक्ष 26 सितंबर 2026 से 10 अक्टूबर 2026 तक है। सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को है।

तर्पण का मंत्र क्या है?

सबसे सरल और प्रचलित मंत्र पितृ गायत्री है: ॐ पितृगणाय विद्महे जगतधारिणी धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात् (Om Pitruganaya Vidmahe, Jagatdharini Dhimahi, Tanno Pitru Prachodayat)। अंत में ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बोला जाता है।

अगर पूर्वज की तिथि याद न हो तो श्राद्ध कब करें?

सर्व पितृ अमावस्या पर, जो 2026 में 10 अक्टूबर, शनिवार को है। इस दिन सभी पितरों का एक साथ तर्पण और श्राद्ध किया जाता है।

पितृ दोष के लिए क्या करें?

परंपरा केवल याद और सेवा माँगती है, डरने की कोई बात नहीं। तर्पण, श्राद्ध, पितृ गायत्री का जप और पितरों के नाम पर किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराना, यही सरल उपाय हैं।

क्या महिलाएँ तर्पण कर सकती हैं?

पहले यह काम ज़्यादातर बेटे करते थे, लेकिन आज कई परिवारों में बेटियाँ, पत्नियाँ और कोई भी जो याद करना चाहे, तर्पण करते हैं। अपने परिवार की रीत मानें; सच्चे मन से की गई प्रार्थना हमेशा स्वीकार है।

महाकथा रेडियो दिन-रात पवित्र मंत्र बजाता है, निःशुल्क और बिना विज्ञापन के। लाइव सुनें, या अपने किसी प्रियजन के लिए प्रार्थना अर्पित करें।

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