धनतेरस 2026: पूजा विधि और धन्वंतरि, लक्ष्मी, कुबेर मंत्र
धनतेरस 2026 कब है (6 नवंबर, शुक्रवार), धनतेरस पूजा विधि क्रम से, धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर मंत्र अर्थ सहित, और यम दीपदान की परंपरा।
धनतेरस 2026 में 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को है, दिवाली से दो दिन पहले। इस दिन परंपरा से दो तरह के मंत्र जपे जाते हैं: अच्छी सेहत के लिए भगवान धन्वंतरि का मंत्र, और घर की सुख-समृद्धि के लिए लक्ष्मी और कुबेर के मंत्र। पूजा आमतौर पर शाम को, सूर्यास्त के बाद, दरवाज़े पर दीया जलाकर की जाती है।
धनतेरस 2026 कब है
- धनतेरस: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
- दिवाली और लक्ष्मी पूजा: 8 नवंबर 2026, रविवार (दिवाली के लक्ष्मी मंत्र)
- अगले साल धनतेरस: 27 अक्टूबर 2027, बुधवार
तारीखें नई दिल्ली के लिए हैं; आपके शहर में तिथि का समय थोड़ा अलग हो सकता है।
धनतेरस क्यों मनाते हैं
धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी है, और इसी से दिवाली के पाँच दिन शुरू होते हैं। कथा है कि समुद्र मंथन के समय इसी दिन भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। वे देवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं, इसलिए बहुत से परिवार इस दिन को धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं। यही वजह है कि धनतेरस की पहली कामना अच्छी सेहत की होती है, और उसके बाद घर की समृद्धि की।
धन्वंतरि मंत्र: सेहत के लिए
धन्वंतरि मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलश हस्ताय सर्वामय विनाशाय त्रैलोक्यनाथाय धन्वन्तरि महाविष्णवे नमः Om Namo Bhagavate Vasudevaya Dhanvantaraye Amritakalasha Hastaya Sarvamaya Vinashaya Trailokyanathaya Dhanvantari Mahavishnave Namah
अर्थ: विष्णु के रूप भगवान धन्वंतरि को नमस्कार, जो हाथ में अमृत कलश लिए हैं, सब कष्ट हरते हैं और तीनों लोकों के स्वामी हैं। यह धन्वंतरि की पारंपरिक प्रार्थना है, जो सुकून और अच्छी सेहत की कामना से जपी जाती है। Mahakatha पर सुनें: धन्वंतरि मंत्र
धन्वंतरि जप मंत्र
ॐ श्री धन्वंत्रे नमः Om Shree Dhanvantre Namah
अर्थ: हे भगवान धन्वंतरि, मैं आपका स्मरण करता हूँ और आपका आशीर्वाद माँगता हूँ। छोटा मंत्र है, माला पर जपने में आसान; अच्छे स्वास्थ्य और सकारात्मक मन के लिए जपा जाता है। Mahakatha पर सुनें: धन्वंतरि जप मंत्र
मंत्र मन को शांत और आशावान रखने में साथ देते हैं, पर डॉक्टर की जगह नहीं लेते; ज़रूरत हो तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें। और पढ़ें: अच्छी सेहत के मंत्र।
लक्ष्मी और कुबेर मंत्र: समृद्धि के लिए
कुबेर मंत्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा Om Yakshaya Kuberaya Vaishravanaya Dhanadhanyadhipataye Dhanadhanyasamriddhim Me Dehi Dapaya Svaha
अर्थ: धन और अन्न के स्वामी कुबेर को नमस्कार; हमें धन-धान्य की भरपूरता दें। कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं, और बहुत से परिवार धनतेरस और दिवाली पर लक्ष्मी जी के साथ उनकी भी पूजा करते हैं। Mahakatha पर सुनें: कुबेर मंत्र
कुबेर धनलक्ष्मी मंत्र
ॐ कुबेराय ॐ धनदाय ॐ धनलक्ष्मी सदावसाय नमः Om Kuberaya Om Dhanadaya Om Dhanalakshmi Sadavasaya Namah
अर्थ: धन के रक्षक कुबेर का आशीर्वाद माँगते हैं, जिनमें लक्ष्मी सदा निवास करती हैं। पैसे से जुड़े लक्ष्यों पर ध्यान टिकाने के लिए जपा जाता है। Mahakatha पर सुनें: कुबेर धनलक्ष्मी मंत्र
दैनिक लक्ष्मी जप
ॐ महालक्ष्मी धनदायिनी शुभदायिनी वरदायिनी नमः Om Mahalakshmi Dhanadaayini Shubhadaayini Varadaayini Namah
अर्थ: धन देने वाली, शुभ देने वाली और वर देने वाली महालक्ष्मी को नमस्कार। एक सरल रोज़ का लक्ष्मी मंत्र, जो धनतेरस की शाम के लिए भी उपयुक्त है। Mahakatha पर सुनें: दैनिक लक्ष्मी जप
ये मंत्र एक शांत, आभारी और उदार घर की प्रार्थना हैं, पैसे का कोई वादा नहीं। मेहनत और समझदार फ़ैसलों की जगह कोई मंत्र नहीं ले सकता। और पढ़ें: धन और समृद्धि के मंत्र।
धनतेरस पूजा विधि
अगर आपके परिवार की अपनी परंपरा है, तो उसी को मानें। एक सादी शाम की पूजा कुछ ऐसी हो सकती है:
- सफ़ाई और रोशनी: घर और मुख्य दरवाज़ा साफ़ करें, दरवाज़े पर छोटी-सी रंगोली बनाएँ।
- पहले गणेश जी: कुछ बार "ॐ गं गणपतये नमः" बोलें, फिर आगे की पूजा करें।
- धन्वंतरि पूजा: दीया जलाएँ, फूल और थोड़ी तुलसी चढ़ाएँ, और पूरे परिवार की सेहत को मन में रखते हुए धन्वंतरि मंत्र 11 या 21 बार जपें।
- लक्ष्मी और कुबेर पूजा: फूल, अक्षत और मिठाई चढ़ाएँ, और उनका कोई एक मंत्र माला पर 108 बार जपें, या जितना ध्यान से हो सके। गिनती के लिए नाम जप काउंटर भी काम आएगा।
- यम दीपदान: बहुत से घरों में शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके एक दीया जलाया जाता है। यह परिवार की रक्षा और अकाल मृत्यु से बचाव की पुरानी प्रार्थना है। दीया ऐसी जगह रखें जहाँ हवा से कुछ न पकड़े और बच्चे न पहुँचें।
- छोटी-सी खरीदारी, अगर चाहें: बहुत से परिवार धनतेरस पर नया बर्तन, थोड़ा चाँदी-सोना या झाड़ू खरीदते हैं, लक्ष्मी जी के स्वागत के प्रतीक के रूप में। खुशी से खरीदी गई कोई छोटी चीज़ भी इस दिन की भावना के अनुरूप है; कर्ज़ लेकर खरीदारी की ज़रूरत नहीं।
दो दिन बाद लक्ष्मी पूजा है। उस रात के मंत्र और विधि के लिए दिवाली लक्ष्मी मंत्र देखें।
महाकथा रेडियो एक निःशुल्क, 24 घंटे चलने वाला मंत्र रेडियो है, बिना विज्ञापन, जिस पर ऐसे लक्ष्मी मंत्र दिन-रात बजते हैं। शाम की पूजा की तैयारी करते हुए लाइव सुनें। किसी अपने की सेहत के लिए प्रार्थना करनी हो तो "प्रार्थना अनुरोध" रोज़ सुबह 7 बजे और शाम 7 बजे (भारतीय समय) प्रसारित होता है; प्रार्थना ₹251 से यहाँ अर्पित करें।
लोग पूछते हैं
धनतेरस 2026 में कब है?
धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को है। पूजा शाम को सूर्यास्त के बाद की जाती है; सही मुहूर्त अपने स्थानीय पंचांग से देखें।
धनतेरस पर कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?
सेहत के लिए धन्वंतरि मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये...), और समृद्धि के लिए लक्ष्मी और कुबेर के मंत्र। शुरुआत हमेशा गणेश जी से करें।
धन्वंतरि का मूल मंत्र क्या है?
पारंपरिक मंत्र है ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलश हस्ताय सर्वामय विनाशाय त्रैलोक्यनाथाय धन्वन्तरि महाविष्णवे नमः, जो ऊपर अर्थ सहित दिया है।
क्या धन्वंतरि मंत्र रोज़ जप सकते हैं?
हाँ। यह सेहत और सुकून की एक सरल प्रार्थना है, रोज़ 11, 21 या 108 बार जप सकते हैं। सेहत की किसी भी परेशानी में डॉक्टर से मिलते रहें; मंत्र साथ देता है, दवा की जगह नहीं लेता।
धनतेरस पर यम का दीया क्यों जलाते हैं?
परंपरा है कि धनतेरस की शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के लिए दीया जलाने से परिवार की रक्षा की प्रार्थना होती है। इसे यम दीपदान कहते हैं; जिन घरों में यह रिवाज़ है, वे इसे हर साल निभाते हैं।
धनतेरस क्यों मनाया जाता है?
इस दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए माने जाते हैं, और इसी से दिवाली के पाँच दिन शुरू होते हैं। परिवार पहले सेहत की, फिर समृद्ध साल की प्रार्थना करते हैं।